छोटे कामों को भी बड़े ढंग से करने पर व्यक्ति महान बनता है- प्रो. जैन
लाडनूँ, 23 जुलाई 2022। जैन विश्व भारती संस्थान के शिक्षा विभाग के अंतर्गत चल रहे जीवन कौशल पर तीन दिवसीय सेमिनार के द्वितीय दिवस अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने कहा कि सफल लोग महान काम नहीं करते, वो छोटे-छोटे कामों को महान ढंग से करते हैं। थामस एडीसन को स्कूल में मंदबुद्धि का बालक समझ कर शिक्षक ने पढ़ाने से मना कर दिया, लेकिन उनकी माँ ने खुद उसे पढ़ाकर एक महान व्यक्तित्त्व बना दिया। सफलताओं की इन कहानियों के पीछे असफलताओं की कहानियां जुडी हुई हैं। हमें असफलताओं से सीख लेकर जीवन में आगे बढने की प्रेरणा प्राप्त होती हैं।
पीछे की ओर ढकेल देती है नकारात्मक सोच
सेमिनार में हर्षिता पारीक ने अध्यात्म और संस्कृति विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि संस्कृति, संस्कार और अध्यात्म से मानव जीवन को उज्ज्वल बनाया जा सकता हैं। भारतीय संस्कृति में प्रकृति को पूज्य माना गया है। आज भी हम सूर्य देवता को जल चढ़ाकर पूजा अर्चना करते हैं। पीपल, तुलसी, गाय आदि को भी पूजा जाता हैं। भारतीय संस्कृति को अपने धर्म और अध्यात्म के कारण विश्व में विशेष संस्कृति के रूप में माना जाता हैं। हमें अपनी संस्कृति को संरक्षित और संवर्धित करना चाहिए। दिव्या पारीक ने जीने की कला विषय पर कहा कि जीवन में हमें सकारात्मक सोच रखते हुए कार्य करना चाहिए, नकारात्मक सोच मानव को पीछे की ओर ढकेल देती है। जीवन में हमें कठिनाई या चुनौतियों से घबराकर बैठना नहीं चाहिए, अपितु इनसे सीख लेकर आगे बढने का प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम का संयोजन तथा आभार ज्ञापन डॉ. अमिता जैन ने किया। कार्यक्रम में सभी संकाय सदस्य डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. बी. प्रधान, डॉ. विष्णु कुमार, डॉ. सरोज राय, डॉ. आभा सिंह, डॉ. गिरिराज भोजक, डॉ. गिरधारी लाल, डॉ. अजीत पाठक, प्रमोद ओला तथा खुशाल जांगिड एवं समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे।
आत्मविश्वास होने पर किसी के मोटिवेशन की जरुरत नही पड़ती- साक्षी शर्मा
लाडनूँ, 21 जुलाई 2022। जैन विश्व भारती संस्थान के शिक्षा विभाग के अन्तर्गत जीवन कौशल पर तीन दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आत्मविश्वास, मोटिवेशन, टेलेंट, हार्ड वर्क, स्मार्ट वर्क आदि हमारे जीवन के पहलू हैं। इन्हीं के आधार पर हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। स्मृति कुमारी ने ‘हार्ड वर्क से बेहतर है स्मार्ट वर्क’ पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि स्मार्ट वर्क का मतलब सही रणनीति बनाकर चलना हैं और हार्डवर्क कोई भी ऐसा काम, जिसको करने का भले ही मन ना करे, पर अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए काम करना है। स्मार्ट वर्क के अंतर्गत हमें स्वविकास को कभी नही भूलना चाहिये। स्मार्ट वर्कर बनना है, तो अपनी योजना समय के हिसाब से बनानी होगी और अपने काम को प्राथमिकता देनी होगी। और हमें यह समझना होगा कि स्मार्ट वर्क हम क्या करते हैं इस बारे में नहीं है, बल्कि हम किसी कार्य को कैसे करते हैं, जो हमें दूसरों से अलग बनाता हैं वह स्मार्ट वर्क हैं। साक्षी शर्मा ने कहा कि मोटिवेशन हर व्यक्ति के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। मोटिवेशन अंतर-आत्मा से प्राप्त होता है। अन्दर से मोटिवेशन प्राप्त करने के लिए विद्वानों की पुस्तकों को पढना होगा, दूसरों की प्रगति को देखकर आगे बढना होगा। मोटिवेशन और आत्मविश्वास दोनों का घनिष्ठ सम्बन्ध है। अगर हमारे अंदर आत्मविश्वास होगा तो हमें किसी दूसरे से मोटिवेशन की जरुरत ही नही पड़ेगी। कार्यक्रम का संयोजन तथा आभार ज्ञापन डॉ. अमिता जैन ने किया। कार्यक्रम में डॉ. मनीष भटनागर, डॉ. बी.प्रधान, डॉ. विष्णु कुमार, डॉ. सरोज राय, डॉ. आभा सिंह, डॉ. गिरिराज भोजक, डॉ. गिरधारी लाल, डॉ. अजीत पाठक, प्रमोद ओला, खुशाल जांगिड आदि सभी संकाय सदस्य एवं समस्त विद्यार्थी उपस्थित रहे।




