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शोध, अन्वेषण और आविष्कार में सबसे अग्रणी है जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय

शोध, अन्वेषण और आविष्कार में सबसे अग्रणी है जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय

लगातार पैटेंट प्राप्त कर देश के सम्मुख प्रस्तुत की नई सोच

लाडनूँ, 11 फरवरी 2026। जैन विश्वभारती संस्थान देश के अन्य विश्वविद्यालयों से बहुत अलग है। यहां विद्यार्थियों के लिए आध्यात्मिक व प्राकृतिक हरितिमा युक्त वातावरण ही नहीं, बल्कि शिक्षा ग्रहण करने को यहां उपलब्ध हर तरह की सुविधाएं, अनुभवी व दक्ष प्राध्यापकगण सुगम बना देते हैं। यहां के शिक्षकों ने शोध और अनुसंधान क्षेत्र में भी नए-नए रिकाॅर्ड स्थापित किए हैं। अन्तर्राष्टीय व राष्टीय स्तर पर इनकी खोजों और आविष्कारों को लगातार पेटैंट प्राप्त हो रहे हैं, जिनसे इस संस्थान की उत्कृष्टता स्वतः प्रकट हो रही है। यह उपलब्धि जैन विश्व भारती संस्थान की शोध संस्कृति को अधिक सशक्त बनाते हुए विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भी मूल्य-आधारित नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में प्रेरित करेगी। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारतीय अहिंसक दर्शन और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से समाज में स्थायी शांति और सकारात्मक परिवर्तन के नए मार्ग प्रशस्त किए जा सकते हैं।

अहिंसा एवं शांति विभाग के संकाय सदस्यों ने करवाए भारत सरकार के अधीन दो पेटेंट पंजीकृत

 

संस्थान के अहिंसा एवं शांति विभाग के संकाय सदस्यों डॉ. रविंद्र सिंह राठौड़ डॉ. लिपि जैन तथा डॉ. बलबीर सिंह ने भारत सरकार के अधीन दो पेटेंट पंजीकृत करवाए जिसमें प्रथम पेटेंट का शीर्षक - AI Based Psychology Metrics Evaluation Kiosk हैं। यह पंजीकृत डिजाइन पेटेंट है, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से मनोवैज्ञानिक आकलन एवं मानसिक स्थिति का विश्लेषण करना है। यह कियोस्क उपयोगकर्ता के व्यवहार, प्रतिक्रियाओं एवं डेटा के आधार पर मनोवैज्ञानिक मेट्रिक्स का मूल्यांकन करता है। इसकी उपयोगिता शैक्षणिक संस्थानों, मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों, परामर्श सेवाओं तथा अनुसंधान कार्यों में मानसिक स्वास्थ्य आकलन और निर्णय-समर्थन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दूसरे पेटेंट का शीर्षक - Automated System for Personality and Behavior है। यह भी पंजीकृत डिजाइन पेटेंट है, जिसका उद्देश्य तकनीक आधारित स्वचालित प्रणाली के माध्यम से व्यक्तित्व एवं व्यवहार का वैज्ञानिक मूल्यांकन करना है। यह प्रणाली उपयोगकर्ता के डेटा, प्रतिक्रियाओं एवं व्यवहारिक संकेतकों का विश्लेषण कर सटीक आकलन प्रदान करती है। इसकी उपयोगिता शिक्षा, मनोविज्ञान, मानव संसाधन प्रबंधन, परामर्श सेवाओं तथा अनुसंधान के क्षेत्रों में व्यक्तित्व विश्लेषण और निर्णय-निर्माण को सशक्त बनाने में है।

अहिंसा और शांति पर आधारित नवाचार: जेवीबीआई के शिक्षकों के चार पेटेंट प्रकाशित

संस्थान ने अहिंसा, शांति और मानवीय मूल्यों पर आधारित अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के शिक्षकों द्वारा विकसित चार नवाचारी शोध कार्यों के पेटेंट भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा प्रकाशित किए गए हैं। पिछले वर्ष भी अहिंसक व्यवहार प्रशिक्षण प्रणाली से संबंधित एक यूटिलिटी पेटेंट तथा इसी क्षेत्र से जुड़े दो डिजाइन पेटेंट प्रकाशित हो चुके, जो अहिंसा और शांति के क्षेत्र में संकाय सदस्यों के निरंतर अनुसंधान प्रयासों को दर्शाते हैं। ये पेटेंट विशेष रूप से अहिंसा, नैतिक निर्णय-प्रक्रिया, सामाजिक समरसता और सकारात्मक मानवीय व्यवहार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किए गए हैं। जैन विश्वभारती संस्थान की स्थापना ही अहिंसा, शांति और मूल्य-आधारित शिक्षा के प्रसार के लिए हुई थी, और यह उपलब्धि उसी परंपरा को आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ जोड़ने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

अभी प्रकाशित पेटेंटों में System for Embedding Nonviolent Ethical Values in Organizational Decision & Making Structures के माध्यम से संस्थागत निर्णय-प्रक्रिया में अहिंसक और नैतिक मूल्यों को समाहित करने की व्यवस्था विकसित की गई है। इसी प्रकार Augmented & Reality Based System for Experiential Learning to Cultivate Prosocial Personality Traits में आधुनिक ऑगमेंटेड रियलिटी तकनीक का उपयोग करते हुए सहानुभूति, सहयोग और सकारात्मक सामाजिक व्यवहार जैसे गुणों को विकसित करने की अवधारणा प्रस्तुत की गई है।

इसके अतिरिक्त System for Decentralized and Nonviolent Redistribution of Community Resources में सामुदायिक संसाधनों के न्यायसंगत और अहिंसक वितरण के लिए एक तकनीकी मॉडल प्रस्तावित किया गया है, जबकि Wearable Dialogue Band for Facilitating Behavioral Change through Nonviolent Communication नामक नवाचार संवाद और संप्रेषण के माध्यम से व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए एक वेयरेबल उपकरण की अवधारणा प्रस्तुत करता है। इन सभी नवाचारों का मूल उद्देश्य अहिंसा के सिद्धांतों को व्यवहारिक जीवन और सामाजिक तंत्र में लागू करनाहै।

इन पेटेंटों के आविष्कारकों में डॉ. लिपि जैन, प्रो. युवराज सिंह खंगारोत, डॉ. रवीन्द्र सिंह राठौड़, डॉ. बलबीर सिंह तथा अभिषेक चरण शामिल हैं। इन शोधकर्ताओं ने आधुनिक तकनीक और भारतीय मूल्य परंपरा के समन्वय के माध्यम से ऐसे मॉडल विकसित करने का प्रयास किया है, जो समाज में शांति, संवाद, न्याय और सहअस्तित्व को प्रोत्साहित कर सके।

संस्थान के शिक्षकों ने कहा कि यह कार्य केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अहिंसा और शांति के दर्शन को व्यवहारिक और तकनीकी समाधानों के माध्यम से समाज में लागू करना है।

दो पेटेंट प्रकाशित- ‘⁠शिक्षा पैटर्न विश्लेषण उपकरण’ एवं ‘स्टूडेंट आई.क्यू लेवल डिटेक्शन डिवाइस’

संस्थान के शिक्षा विभाग के ‘शिक्षा पैटर्न विश्लेषण उपकरण’ पेटेंट प्रो. बी.एल.जैन, डॉ. अमिता जैन, डॉ. गिरधारी लाल शर्मा, डॉ. देवी लाल कुमावत, सुश्री स्नेहा शर्मा का एवं “स्टूडेंट आई.क्यू लेवल डिटेक्शन डिवाइस” विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल.जैन, डॉ. अमिता जैन, डॉ. आभा सिंह, डॉ. विष्णु कुमार का प्रकाशित हैं। “⁠शिक्षा पैटर्न विश्लेषण उपकरण” एक बुद्धिमान प्रणाली है, जिसे डेटा-संचालित तकनीकों का उपयोग करके छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन, व्यवहार संबंधी प्रवृत्तियों और सीखने के पैटर्न की निगरानी, विश्लेषण और व्याख्या करने के लिए डिजाइन किया है। यह उपकरण छात्रों की व्यस्तता, क्षमताओं और जोखिम कारकों के बारे में पूर्वानुमानित अंतर्दृष्टि उत्पन्न करने के लिए सेंसर, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, डेटा, उपस्थिति रिकॉर्ड, मूल्यांकन परिणाम और इंटरेक्शन लॉग को एकीकृत करता है। मशीन लर्निंग एल्गोरिदम और पैटर्न रिकग्निशन मॉडल को लागू करके, ⁠शिक्षा पैटर्न विश्लेषण उपकरण सीखने के व्यवहार में छिपे संबंधों की पहचान करता है, जिससे व्यक्तिगत निर्देश और प्रारंभिक हस्तक्षेप रणनीतियाँ संभव हो पाती हैं। यह प्रणाली पाठ्यक्रम अनुकूलन, अनुकूलन योग्य मूल्यांकन डिजाइन और प्रदर्शन पूर्वानुमान में शिक्षकों का समर्थन करती है। अंततः, कच्चे शैक्षणिक डेटा को शिक्षकों, संस्थानों और नीति निर्माताओं के लिए कार्रवाई योग्य बुद्धिमत्ता में बदलकर शैक्षिक गुणवत्ता को बढ़ाता है।

छात्र आईक्यू लेवल डिटेक्शन डिवाइस (SILD) एक बुद्धिमान मूल्यांकन प्रणाली है, जिसे अनुकूलक परीक्षण, व्यवहार विश्लेषण और रियल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग के माध्यम से संज्ञानात्मक क्षमताओं का मूल्यांकन करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह डिवाइस किसी छात्र के इंटेलिजेंस क्वोशिएंट (IQ) स्तर का अनुमान लगाने के लिए मानकीकृत साइकोमेट्रिक मॉड्यूल, समस्या-समाधान कार्यों, स्मृति मूल्यांकन, तार्किक तर्क परीक्षण और पैटर्न पहचान अभ्यासों को एकीकृत करता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एल्गोरिदम और सांख्यिकीय मॉडलिंग का उपयोग करके, यह प्रणाली निष्पक्ष स्कोरिंग, पूर्वाग्रह में कमी और छात्र की प्रतिक्रियाओं के आधार पर कठिनाई स्तर के स्वतः समायोजन को सुनिश्चित करती है। यह उपकरण शिक्षकों और मनोवैज्ञानिकों को संरचित संज्ञानात्मक प्रोफाइल प्रदान करता है, जो मौखिक समझ, वर्किंग मेमोरी, प्रोसेसिंग स्पीड और विश्लेषणात्मक तर्क जैसी क्षमताओं को उजागर करता है।

 

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