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संस्कृत दिवस व रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित

संस्कृत दिवस व रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित

संस्कृत साहित्य का पठन-पाठन जीवन में आवश्यक- प्रो. जैन

लाडनूँ, 20 अगस्त 2024। जैन विश्वभारती संस्थान के शिक्षा विभाग में संस्कृत दिवस एवं रक्षाबंधन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने कहा कि संस्कृत भाषा संसार की प्राचीनतम भाषा है। इस भाषा में नवीन विषय सामग्री के साथ विश्व की प्रत्येक समस्या का समाधान निहित है। यह भाषा भौतिकता की अपेक्षा आध्यात्मिकता से ओतप्रोत है। इस भाषा में वेद, उपनिषद, स्मृति, पुराण आदि श्रेष्ठ ग्रन्थ लिखे गये हैं। अतः भारतीय संस्कृति का स्त्रोत संस्कृत भाषा ही है और इसका साहित्य अत्यधिक समृद्ध है। हमें अपने जीवन में संस्कृत साहित्य का पठन-पाठन करना चाहिए। उन्होंने रक्षाबंधन के महत्व के बारे में बताया कि रक्षाबंधन आध्यात्मिक पृष्ठभूमि का पर्व है। जिसमें आध्यात्मिक संकल्प के साथ बहनें अपने भाइयों के राखी बांधती है और तिलक लगाती हैं। इस दिन पवित्र कार्यों में पवित्र कार्य में संपृक्तता और कोई गलत कार्य नहीं करने की अपेक्षा हर बहिन की अपने भाई से रहती है। इस अवसर पर बांधा जाने वाला पवित्र धागा धार्मिक एवं आत्मिक मनोभावों को लेकर बांधा जाता है। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अमिता जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किये तथा शिक्षा विभाग की समस्त संकाय सदस्य एवं छात्राएं उपस्थिति रही।

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