लाडनूँ, 27 मार्च 2026। संस्थान के शिक्षा विभाग में 27 मार्च को ‘क्वांटम सुरक्षा और पोस्ट-क्वांटम युग’ विषय पर आयोजित व्याख्यान में छात्राओं को आधुनिक तकनीक और साइबर सुरक्षा के बदलते स्वरूप के बारे में जानकारी दी गई। सहायक आचार्य खुशाल जाँगिड़ ने व्याख्यान में बताया कि क्वांटम कंप्यूटिंग पारंपरिक कंप्यूटरों से भिन्न होती है, क्योंकि यह क्यूबिट पर आधारित होती है, जो एक साथ 0 और 1 दोनों अवस्थाओं में रह सकता है। इससे इसकी गणनात्मक क्षमता अत्यधिक बढ़ जाती है। उन्होंने पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन जैसी नई सुरक्षा तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी, जो भविष्य में डेटा को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी। साथ ही यह भी बताया गया कि क्वांटम कंप्यूटर स्वयं भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं और इनमें हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर स्तर पर कई प्रकार की कमजोरियाँ होती हैं, जैसे क्रॉसटॉक, साइड-चैनल अटैक और सर्किट चोरी, जो नई चुनौतियाँ प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और हाइब्रिड एन्क्रिप्शन के संयोजन के माध्यम से सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। अंत मे अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. बीएल जैन ने बताया कि इस व्याख्यान से छात्राओं में नई तकनीकों की समझ विकसित हुई, साइबर सुरक्षा के महत्व का ज्ञान हुआ तथा भविष्य में उपलब्ध होने वाले शोध एवं कॅरियर के अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। कार्यक्रम में विभाग के सभी सहायक आचार्य और छात्राएं उपस्थित रहीं।




