भाषा वृक्ष प्रदर्शन’ प्राचीन भाषाई स्रोत, भाषा परिवार, उपभाषा समूह, आधुनिक भाषा-बोलियों का प्रतिनिधित्व करता है- प्रो. जैन
लाडनूँ, 4 दिसम्बर 2025। जैन विश्वभारती संस्थान विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में एन.सी.टी.ई.एवं यू.जी.सी. के निर्देशानुसार ‘भारतीय भाषा उतसव’ का एक सप्ताह की कार्यक्रम श्रृंखला का आयोजन 11 दिसम्बर तक किया जाएगा। गुरूवार को उत्सव के प्रथम दिवस पर आयोजित किए गए कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने की। उन्होंने ‘भाषा वृक्ष प्रदर्शन’ पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भाषा वृक्ष प्रदर्शन एक शिक्षण-सहायक दृश्य प्रस्तुति है, जिसके माध्यम से भाषाओं के विकास, विस्तार और संरचनात्मक संबंधों को वृक्ष के रूप में दर्शाया जाता है। इस प्रदर्शन में भाषा को एक जीवित वृक्ष की उपमा दी जाती है, जहां जड़ें मूल भाषा या प्राचीन भाषाई स्रोत को दर्शाती हैं। तना भाषा परिवार का प्रतीक होता है, जबकि मुख्य शाखाएं विभिन्न उपभाषा-समूहों और भाषाई धाराओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन शाखाओं से निकलने वाली छोटी-छोटी टहनियां आधुनिक भाषाओं तथा उनकी बोलियों को चित्रित करती हैं। यह प्रदर्शन विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी होता है, क्योंकि यह जटिल भाषाई संबंधों को सरल, स्पष्ट और रोचक रूप में प्रस्तुत करता है। भाषा-विज्ञान में उपयोग होने वाली ऐतिहासिक और तुलनात्मक पद्धतियों को समझने में भी यह सहायक है। भाषा वृक्ष प्रदर्शन के माध्यम से भाषा परिवारों की उत्पत्ति, विकास-क्रम, भौगोलिक विस्तार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भाषाई समानताओं-असमानताओं को एक ही दृश्य में समझाया जा सकता है। इस कार्यक्रम में संध्या, आरती स्वामी, कविता स्वामी, पूजा स्वामी, रेणु कंवर, अनिता आदि विद्यार्थियों ने भाग लेते हुए भाषा, हिन्दी व्याकरण, विलोम शब्द, वर्ण, व्यंजन आदि क्षेत्रों का भाषा वृक्ष तैयार किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अमिता जैन ने किया। कार्यक्रम में समस्त संकाय सदस्य एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।




